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अपनी अपनी आँखें हैं तो अपना अपना क़िस्सा होगा
अपनी अपनी ज़बान का अपना अपना लहज़ा होगा

अपनी अपनी पीठ के नीचे अपना अपना दर्द टिकेगा
अपने अपने कान के पीछे अपना अपना धूल बसेगा

अपने अपने अपनों का अपना अपना दूसरा होगा
हर तीसरी नुककड़ का अपना अपना झगड़ा होगा

अपनी अपनी शिकायतों की अपनी अपनी रसीदें होंगी
अपनी अपनी आंसुओं का अपना अपना फ़ायदा होगा

अपनी अपनी हंसी के पीछे अपनी अपनी हार होगी
अपने अपने मोज़ों में छिपी अपनी अपनी शर्म होगी

अपने अपने पैरों तले अपना अपना आकाश खुलेगा
अपने अपने तारों के बीच अपना अपना सा चाँद होगा.

***

 

पोस्ट स्क्रिप्ट:
…प्रेम की एक ही पाती
पर रोज़ अलग अलग
अदाओं के साथ
बाँचती ये तीन औरतें
खट्टी-मीठी नज़रों से
दुनिया को देखती हुई
बुनती रहती हैं
हाथों से
अपना अपना चाँद…

शुक्ला चौधुरी  (तीन गर्भवती महिलाएँ)

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